इस उम्र के बाद पैरेंट्स को बच्चों के साथ सोना कर देना चाहिए बंद, ये है वजह

किस उम्र तक माता-पिता को बच्चों के साथ सोना चाहिए। क्या एक निश्चित उम्र के बाद बच्चों के साथ सोना सही रहता है। आपको बता दें कि बहुत से मां-बाप बच्चों संग काफी उम्र तक सोते हैं।

जो सही नहीं होता। ऐसे में आपको बता रहे हैं कि किस उम्र तक माता-पिता को बच्चों के साथ सोना चाहिए और किस उम्र के बाद नहीं।  

माता-पिता को कभी भी 12 महीने से कम उम्र के बच्चों के साथ बेड शेयर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे SIDS (सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम) और दम घुटने से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

हर किसी की नींद से संबंधित अलग-अलग जरूरतों के कारण साथ में सोने से कई बार आपको और बच्चे को सही से नींद आने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आप अपने बच्चे के साथ सो रहे हैं, तो इस बात का ख्याल रखें कि उसे दिन भर में अच्छी तरह से आराम मिला हो। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा है तो साथ सोने के अलावा आपके पास और भी कई विकल्प हैं।

जैसे आप कमरे में एक एक्स्ट्रा बिस्तर रख सकते हैं। बच्चे के सोने के बाद आप उसमें सो सकते हैं, ताकि आपका बच्चा बेड पर खुलकर सो सके और उसे नींद के दौरान किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े। आप चाहे तो बच्चे को सुलाने के बाद दूसरे कमरे में भी सो सकते हैं। 

बच्चों के साथ बेड शेयर करना कई बार काफी अच्छा भी साबित होता है। खासकर उस समय जब माता-पिता दोनों अलग-अलग रहते हैं। 
यह जानना काफी जरूरी है कि किस स्टेज पर आपको अपने बच्चे के साथ सोना बंद कर देना चाहिए।

जब आपको अपने बच्चे में शारीरिक बदलाव नजर आने लगें तो आपको उनके साथ सोना बंद कर देना चाहिए। इसे प्री-प्यूबर्टी (यौवनारम्भ) कहा जाता है। प्यूबर्टी या प्री-प्यूबर्टी  उस समय को कहा जाता है जब आपके बच्चे का शरीर यौन रूप से परिपक्व होने लगता है।

इस दौरान लड़कियों में ब्रेस्ट का विकास और पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ बढ़ना, प्राइवेट पार्ट के आकार में वृद्धि जैसे शारीरिक परिवर्तन होते हैं। प्यूबर्टी फेज शुरू होने की औसत उम्र लड़कियों में 11 साल और लड़कों में 12 साल होती है।

हालांकि, लड़कियों में 8 साल से 13 साल के बीच प्यूबर्टी का शुरू होना भी सामान्य है। वहीं, लड़कों में प्यूबर्टी 9 साल की उम्र से लेकर 14 साल की उम्र के बीच शुरू हो सकती है।

प्यूबर्टी के दौरान बच्चों के शरीर में कई तरह के बदलाव हो रहे होते हैं, ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चों को स्पेस दें। इससे वह सहज रहेंगे। अगर आप बच्चों को एक ही बेड पर सुलाते हैं तो इससे आपकी प्राइवेसी भी प्रभावित होती है।

हालांकि, आप ये जरूर सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा अगर दूसरे कमरे में या अलग बिस्तर पर सोएं तो उसे सुरक्षित और सहज महसूस हो। जब आपका टीनेजर बच्चा किसी बात को लेकर परेशान हो तो भी उसे अपने पास सोने के लिए कह सकते हैं।

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