जानिए अस्थमा कैसे विकसित होता है? जानें कैसे करें बचाव

अस्थमा वायुमार्ग को प्रभावित करता है। श्वासनली वह है जो हमारे फेफड़ों में और बाहर हवा लेती है। हड्डी में ये नलिकाएं सूज जाती हैं, जिससे वे संकीर्ण हो जाती हैं और फेफड़ों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त हवा नहीं होती है।

इससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है।

अस्थमा बच्चों और बुजुर्गों में आम है । मौसमी परिवर्तन, धूल और धुएं जैसी कुछ स्थितियों से अस्थमा के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। इससे सीने में दर्द, खांसी, नाक बंद और सांस लेने में तकलीफ होती है।

धूल के कण, धुआं, सांस लेने में तकलीफ और भावनात्मक कारणों से आस्था में अटैक की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा घास, छड़ी आदि के परागकणों, गैस, पेंट, धूम्रपान और रासायनिक उत्पादों की गंध के कारण अस्थमा का दौरा पड़ता है।

मौसमी परिवर्तन के कारण होने वाले वायरल संक्रमण से भी अस्थमा बढ़ जाता है परफ्यूम, हेयर स्प्रे आदि की महक से भी अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण अस्थमा बढ़ने की भी संभावनाएं हैं कुछ खाद्य पदार्थ भी अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं । ब्रेड, पास्ता, केक और पेस्ट्री के अत्यधिक सेवन से हड्डियों के द्रव्यमान में वृद्धि हो सकती है।

इसके अलावा मूंगफली, सोया, मछली और अंडे, दूध और दूध से बने उत्पाद भी अस्थमा की संभावना को बढ़ाते हैं । इसलिए ऐसी चीजों से दूर ही रहना चाहिए।

लगातार छींक आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न आदि अस्थमा के लक्षण हैं।

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